समावेशी सोच और लोकतांत्रिक भारत की तस्वीर है कांग्रेस पार्टी
आइये कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की बीजेपी की सोच को विस्तार से समझते हैं, जिसकी वजह से ये देश आज बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है।
कांग्रेस पार्टी के मायने मात्र सोनियाजी या राहुल गांधी या हाथ का पंजा का निशान केवल नहीं है। ये गांधी और नेहरू की वो विचारधारा है जिसे कांग्रेस के तमाम बार हार जाने के बावजूद आज तक किसी ने नहीं तोड़ा।
इसीलिए यूपीए सरकार के समय अंतर्राष्ट्रीय साजिशों के तहत कांग्रेस पार्टी के विरूद्ध तमाम झूठे आरोप गढ़े गए और उन आरोपों को लगाकर उसे बुरी तरह बदनाम किया गया और नफरत के सौदागर संघ(आरएसएस) ने जनता के दिलों में कांग्रेस के विरुद्ध नफ़रत की बीज डाली और बेचारी भारतीय जनता समझ ही नहीं पायी और कांग्रेस को हराकर आज जार-जार रो रही है।
महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने से पहले ऐलान करके कहा था कि आजादी के बाद न बाबू राजेन्द्र प्रसाद, न सरदार पटेल और न राजगोपालाचारी, बल्कि जवाहरलाल मेरा उत्तराधिकारी होगा और वो मेरी भाषा बोलेगा।
कांग्रेस माने गांधीजी के तीन मंत्र – आइडिया आफ इंडिया(भारतीयता का विचार), इन्क्लूसिव थाट(समावेशी सोच) और सेक्युलरिज्म या धर्मनिरपेक्षता। आज की सरकार ने इन तीनों विचारों को तोड़ दिया है।
संघ भारत की आजादी के बाद बहुत बिलबिला गया था और हिंदू महासभा भी उसके साथ था। उनके गले में फांस ये अटक गई थी कि बंटवारे का प्रस्ताव तो मुस्लिम लीग के साथ हिंदू महासभा ने पारित किया था, लेकिन देश की सत्ता कांग्रेस के हाथ आ गयी। एक साल बाद ही गांधीजी की हत्या भी कांग्रेसमुक्त भारत का प्रयास था, लेकिन नेहरू गांधी की विचारधारा को लेकर खड़े रहे और भारत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इच्छा का हिंदू-पाकिस्तान नहीं बनने दिया।
गांधीजी ने कांग्रेस और देश को चलाने के लिए न तो खुद के सगे समधी राजगोपालाचारी पर यकीन किया और न खुद के प्रांत गुजरात के सरदार पटेल पर।
आज आइडिया आफ इंडिया को भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत पाकर तोड़ दिया है और मणिपुर पिछले तीन साल से लगातार जल रहा है और मणिपुर संघ की विचारधारा से जल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री वहां एक बार भी नहीं गए जैसेकि वो भारत का हिस्सा ही न हो।
पंजाब के किसान धरना प्रदर्शन करते रहे और 750 के करीब मर भी गये और भाजपा व मोदी उनको खालिस्तानी कहते रहे और गालियां देते रहे, ये आइडिया आफ इंडिया का खुलेआम मर्डर था।
इन्क्लूसिव थाट या समावेशी सोच माने सबके लिए नीतियां किंतु भाजपा सामंतवादी पूंजीवादी व्यवस्था के लिए ही केवल काम करती है। सरकार ने कार्पोरेट टैक्स में 8% सरचार्ज कम किया और उससे होने वाले घाटे क़रीब 1.25 लाख करोड़ रुपए की वसूली आम जनता के दूध-दही-आटा-दाल-मक्खन-कफ़न-बांस पर टैक्स लगाकर पूरी की। पैट्रोल पर हेवी एक्साइज ड्यूटी लगाया। आज भारत में आर्थिक असमानता ब्रिटिश काल में पहुंच गई और बेरोजगारी हद से ज्यादा बढ़ गई है और ये समावेशी सोच का कत्ल है।
सेक्यूलरिज्म या धर्मनिरपेक्षता के मामले के देखें तो मुसलमानों को सड़क पर नमाज न पढ़ने देना, उनका मॉब लिंचिग कर देना और निजी जीवन में हस्तक्षेप तथा बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय सबूत हैं। क्रिसमस पर भाजपा शासित राज्यों में चर्च के परिसरों तोड़फोड़ इत्यादि सेक्युलरिज्म का कत्ल है। मुसलमानों और इसाइयों के साथ ऐसा वर्ताव करना कि मानो वे इस देश के निवासी ही नहीं हैं।













