August 3, 2026
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खाड़ी संकट – डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की सनक का नतीजा

ट्रम्प और नेतन्याहू के पागलपन और अंहकार ने आर्थिक रूप से समृद्ध खाड़ी देशों की तबाही की स्क्रिप्ट लिख दी है। जब कभी भी कोई बददिमाग और पागल व्यक्ति किसी मुल्क की सत्ता पर काबिज होता है, तो वो खुद को दुनियां का मसीहा बनाने की कोशिश में मानवता के‌ लिए खतरा बन जाता है। खाड़ी देश आज जिस संकट का सामना कर रहे हैं, उसके लिए अमेरिकी जनता जिम्मेदार है क्योंकि उन्होंने एक सिरफिरे आदमी के हाथ में ऐसी ताकत दे दी है, जिसका वो हकदार नहीं था।


अमेरिका जिस ईरान को, पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा समझ रहा था, उसने इस जंग में अमेरिका और इजरायल को ऐसा करारा जबाव दिया है जिसकी कल्पना दुनिया के किसी भी खुफिया सूचना इकाई तंत्र और किसी मुल्क ने नहीं किया होगा।
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सुप्रीम नेता की हत्या मानवता के लिए सबसे बड़ा अपराध है। यदि दुनिया ट्रम्प द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति के अपहरण के खिलाफ एकजुट होकर खड़ी हुई होती और उसका बहिष्कार किया होता, तो शायद अमेरिका, ईरान में ऐसी हिमाकत नहीं करता।


इतिहास इस बात का गवाह है कि जो जो देश अमेरिका के सामने तनकर खड़े हुए, अमेरिका अपने साज-ओ-सामान और लाव-ओ-लश्कर समेटकर वहां से पतली गली से निकल गया, चाहे वो ‌वियतनाम हो, क्यूबा हो या अफगानिस्तान हो।
अफगानिस्तान में तो वो बहुत बे-आबरू होकर निकला। और चीन और रूस से टकराने की ताकत नहीं बची है अब अमेरिका में।
पिछले दो-तीन दिनों में, ईरान की मिसाइलों ने इजरायल और तमाम मुस्लिम मुमालिक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है।
अभी तक दुनिया ने जितनी भी लड़ाईयां देखी हैं उनमें यह तकनीकी रूप से सबसे घातक और विध्वंसक युद्ध है।
दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों का यह मानना है, कि ईरान द्वारा इतने उन्नत तकनीक के विध्वंसक हथियार बिना चीन और रूस की मदद के नहीं बनाए जा सकते हैं।


हमने पहली बार इस लड़ाई में इजरायली जनता को जिंदगी की भीख मांगते देखा है और दूसरी ओर ईरानी नेता की शहादत पर वहां की जनता की एकजुटता और ट्रम्प को मुंहतोड़ जवाब देने का आह्वान करते देखा है।
इजरायल ने जैसी तबाही गाजा में किया था, उससे भी ज्यादा तबाही इजरायल के शहर येरूशलम, तेल अवीव, दुबई और बहरीन में दिखी है। बहरीन के जिस अमेरिकी बेस पर ईरान ने मिसाइल हमला किया है उससे वहां की जनता बेहद खुश हैं और एकजुट होकर उन्होंने इसका इजहार किया है जिसके विज़ुअल्स दुनिया ने देखा है।


इजरायल के नागरिकों की हताशा और ईरान की जनता के जुनून और जोश को देख कर लगता है कि अमेरिका जल्द ही इस जंग से अपना पिंड छुड़ाकर भगेगा, क्योंकि अमेरिका ईरान की सामरिक तैयारी का आकलन करने में पूरी तरह से फेल हुआ है।
ट्रम्प के इस पागलपन को अमेरिका की जनता ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है, वहां का सभ्य समाज सड़कों पर उतरकर इसकी मुखालिफत कर रहा है, जिसका असर ट्रम्प के चेहरे पर साफ नजर आ रहा है। ईरान के पलटवार से अमेरिकी सैनिकों में हताशा और डर पैदा हो गया है और वो लड़ने से कतरा रहे हैं, ईरान ने दुनिया के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन को निशाना बनाकर अमेरिका की मेरीटाइम सुप्रीमेसी को गम्भीर चुनौती दे दिया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार अब्राहम लिंकन पर अमेरिकी नेवी के सैकड़ों सैनिकों के मारे जाने की खबर सोशल मीडिया की सुर्खियां बन रही है।


मैं ईरान के इस हौसले को सलाम करता हूं क्योंकि उन्होंने केवल अमेरिका को ही नहीं, उसके सारे पिछलग्गूओं को भी मारा है, इसे कहते हैं घर में घुसकर मारना।
अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की सूचना उनके परिवारों को दी जा रही है, जो बहुत ही दुखदाई है।
ट्रम्प ईरान के जवाबी पलटवार से बैकफुट पर है और वो तमाम बैक चैनलों के जरिए अब इस युद्ध को रोकने की जुगत में लग गया है। इस काम में, उन्होंने नाटो के अपने सहयोगी इटली को लगाया है।
सोशल मीडिया पर ये खबरें भी बहुत तेजी से दुनिया के सामने आने लगी है कि अमेरिकी सिनेट में तमाम रिपब्लिकन सांसद, डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ट्रम्प के मुखालिफ हो गए हैं।
अमेरिका के सैनिकों और उनके सामरिक अड्डों के नुकसान से अमेरिकी जनता में ट्रम्प के खिलाफ असंतोष और भीषण आक्रोश है, क्योंकि विगत कई दशकों के बाद अमेरिका को इतनी जबरदस्त चुनौती मिली है और इसका एकमात्र जिम्मेदार बददिमाग ट्रम्प है।
हमें ट्रम्प को दुनिया का दादा बनने से रोकने के लिए तनकर खड़ा होना चाहिए।

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